‘आरबीआई प्रोफेशनल खो-खो टूर्नामेंट’ की
चैंपियन बनी पश्चिम रेलवे
पश्चिम रेलवे की रणनीति, अनुशासन और अनुभव रहा भारी
निर्णायक मौकों पर पिछड़ी मध्य रेलवे
आदित्य गणपुले, वृषभ वाघ और अभय रत्नाकर ने जिताया खिताब
मध्य रेलवे का आक्रमण दबाव में बिखरा
मुंबई : परेल के ऐतिहासिक लाल मैदान पर खेला गया ‘आरबीआई प्रोफेशनल
इनविटेशन खो-खो टूर्नामेंट 2026’ का फाइनल मुकाबला केवल दो रेलवे टीमों के बीच की भिड़ंत नहीं था, बल्कि यह प्रतिष्ठा, अनुभव, संयम
और रणनीति की असली परीक्षा थी। जनवरी 2026 में मुंबई जिला
अजिंक्यपद स्पर्धा में पश्चिम रेलवे को हराने वाली मध्य रेलवे से एक बार फिर दबदबे
की उम्मीद थी, लेकिन इस बार पश्चिम रेलवे ने कोई गलती नहीं
की। शानदार रणनीति, अनुशासित खेल और परिपक्व प्रदर्शन के दम
पर पश्चिम रेलवे ने मध्य रेलवे को 15-11 से हराकर पहले
‘आरबीआई कप’ पर कब्जा जमाया। यह जीत लगातार अभ्यास, बेहतर
योजना और मजबूत टीम संयोजन का परिणाम साबित हुई।
टॉस जीता, लेकिन मैच गंवाया
मध्य रेलवे ने टॉस जीतकर पहले डिफेंस चुना, लेकिन उसका फायदा उठाने में टीम पूरी तरह
नाकाम रही। उलटे शुरुआत से ही पश्चिम रेलवे ने आक्रामक खेल दिखाते हुए मध्य रेलवे
के डिफेंस पर लगातार दबाव बनाया। हाफ टाइम तक 10-5 की बढ़त
ने ही मैच का रुख तय कर दिया था। मध्य रेलवे का डिफेंस कुछ मौकों पर मजबूत नजर आया,
लेकिन निर्णायक समय में अंक जुटाने में टीम पिछड़ गई। खासतौर पर
आक्रमण के दौरान तालमेल की कमी साफ दिखाई दी। इस मुकाबले में तुषार चिखले ने
मुख्य पंच, जबकि सुशील दहींबेकर और देवेंद्र बर्डे
ने पंच की जिम्मेदारी निभाई।
पश्चिम रेलवे का ‘शाही प्रदर्शन’; हर खिलाड़ी ने निभाई जिम्मेदारी
पश्चिम रेलवे की जीत की सबसे बड़ी खासियत उसका शानदार
सामूहिक प्रदर्शन रहा। टीम किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर नहीं रही, बल्कि हर खिलाड़ी ने जिम्मेदारी निभाई। वृषभ
वाघ ने 2.30 और 2.50 मिनट का मजबूत
डिफेंस करते हुए मध्य रेलवे के आक्रमण की धार कुंद कर दी। आदित्य गणपुले ने
2 और 2.40 मिनट का डिफेंस करते हुए 4
महत्वपूर्ण अंक हासिल किए और मैच के असली ‘गेम चेंजर’ साबित हुए। इसके
अलावा राहुल मंडल (2, 1.10 मिनट डिफेंस व 1 अंक), महेश शिंदे (1, 1.50 मिनट डिफेंस), विजय शिंदे (1 मिनट डिफेंस व 2 अंक), अभय
रत्नाकर, अमित पाटील, निखिल
सोडिये और मजहर जमादार (प्रत्येकी
2 अंक) ने समय-समय पर अहम योगदान देकर जीत पक्की की। पश्चिम
रेलवे के खेल में आत्मविश्वास, नियंत्रण और धैर्य साफ नजर
आया। टीम ने बिना घबराहट परिस्थितियों के अनुसार खेलते हुए मध्य रेलवे को वापसी का
कोई मौका नहीं दिया। यही किसी चैंपियन टीम की सबसे बड़ी पहचान होती है।
मध्य रेलवे की लड़ाई सराहनीय, लेकिन गलतियां पड़ी भारी
हार के बावजूद मध्य रेलवे ने अंत तक संघर्ष नहीं छोड़ा। रामजी
कश्यप ने 2.30 और
नाबाद 1.40 मिनट का डिफेंस करते हुए 1 अंक
अर्जित कर टीम को संभालने का प्रयास किया। दिलीप खांडवी (1.30, 1.30
मिनट डिफेंस व 3 अंक) ने मुकाबले में रोमांच
बनाए रखा। वहीं शुभम थोरात (1, 2.50 मिनट डिफेंस व 1
अंक), आकाश तोगरे (1.20 मिनट डिफेंस), सौरभ घाडगे (1.10 मिनट डिफेंस व 2 अंक) और अर्णव पाटणकर
(2 अंक) ने भी जुझारू खेल दिखाया। हालांकि पूरे मुकाबले में मध्य
रेलवे की सबसे बड़ी कमजोरी रही निरंतरता की कमी और आक्रमण में हुई गलतियां। दबाव
में लिए गए फैसलों का खामियाजा टीम को भुगतना पड़ा। डिफेंस में भी कई बार रणनीतिक
चूक साफ दिखाई दी।
तीसरे स्थान पर महाराष्ट्र पोस्ट
तीसरे स्थान के मुकाबले में महाराष्ट्र पोस्ट ने रचना
नोटरी वर्क्स को 4 मिनट शेष रहते 14-12 से हराकर तीसरा स्थान हासिल
किया।
आदित्य गणपुले और अभय रत्नाकर बने टूर्नामेंट के
हीरो
व्यक्तिगत पुरस्कारों पर नजर डालें तो पश्चिम रेलवे का
दबदबा साफ दिखाई दिया। अभय रत्नाकर को ‘सर्वश्रेष्ठ आक्रमक’, जबकि आदित्य गणपुले को ‘सर्वश्रेष्ठ
ऑलराउंडर’ पुरस्कार मिला। मध्य रेलवे के शुभम थोरात ने ‘सर्वश्रेष्ठ
डिफेंडर’ का पुरस्कार जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की। इन खिलाड़ियों ने पूरे
टूर्नामेंट में लगातार शानदार प्रदर्शन कर दर्शकों का दिल जीता।
पश्चिम रेलवे ने दिया साफ संदेश
इस फाइनल मुकाबले ने यह स्पष्ट कर दिया कि पश्चिम रेलवे अब
सिर्फ नाम की मजबूत टीम नहीं, बल्कि दबाव झेलकर बड़े मुकाबले जीतने वाली परिपक्व टीम बन चुकी है। अमर
हिंद टूर्नामेंट का खिताब कोई संयोग नहीं था, यह पश्चिम
रेलवे ने एक बार फिर साबित कर दिया। दूसरी ओर मध्य रेलवे को अपनी रणनीति और
निर्णायक मौकों पर प्रदर्शन को लेकर गंभीर आत्ममंथन करना होगा।
शानदार पुरस्कार वितरण समारोह
विजेता पश्चिम रेलवे टीम को ₹25,000 नकद और ट्रॉफी, जबकि उपविजेता
मध्य रेलवे को ₹15,000 नकद और ट्रॉफी देकर सम्मानित किया
गया। पूरे टूर्नामेंट में कुल ₹60,000 की पुरस्कार राशि
वितरित की गई। पुरस्कार वितरण समारोह पुनीत पांचोली (मुख्य
महाप्रबंधक, आरबीआई, मुंबई विभाग) के
हाथों संपन्न हुआ। इस अवसर पर सचिन नरसप्पा (सचिव,
आरबीआई स्पोर्ट्स क्लब), सचिन तांबे
(बाह्य विभाग सचिव, आरबीआई स्पोर्ट्स क्लब),
यशवंत नाईक, राजेश पाथरे,
नानासाहेब झांबरे, बालासाहेब तोरसकर,
पराग आंबेकर और सुरेंद्र विश्वकर्मा
उपस्थित थे।
परेल के लाल मैदान पर खेला गया यह फाइनल मुकाबला लंबे समय
तक खो-खो प्रेमियों की यादों में बना रहेगा। ‘आरबीआई प्रोफेशनल इनविटेशन खो-खो
टूर्नामेंट 2026’ ने एक
बार फिर साबित कर दिया कि प्रोफेशनल खो-खो अब नए दौर में प्रवेश कर चुका है।


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